Sunday, 3 December 2017
Sunday, 12 November 2017
Monday, 6 November 2017
विरुद्धान्न (Incompatible Foods) मतलब क्या? जानिये क्या कहता है आयुर्वेद?
कोई भी दो अन्नपदार्थ एक साथ मिलाने के बाद, उनका संयोग (पचने के बाद ) शरीर के लिए हानिकारक साबित हो रहा हो तो उन अन्नपदार्थोंको विरुद्धान्न कहते है.
आजकल हम देखते है ब्रेकफास्ट के लिए दुध या चाय के साथ खारी, ब्रेड, पाव, बिस्किट्स, इत्यादि पदार्थ बड़े-छोटे सब बहोत चाव से खाते है. दुध का प्राकृतिक रस मधुर है, और ऊपर दिए हुए सारे पदार्थोंमें नमक काफी मात्रा में होता है. आयुर्वेद के अनुसार दुध और नमक एकसाथ संयोग में विरुद्धान्न होते है. दुध जो केवल अकेले सेवन करने पे फायदेमंद होता है, नमक के साथ शरीर में जाकर हानि करता है. ऐसे महत्वपूर्ण अन्नघटकोंका किसी भी पदार्थोंके साथ मिश्रण करते समय सावधानी बरतनी चाहिए नहीं तो उनके निरन्तर सेवन से शरीर पर गंभीर परिणाम हो सकते है और इसी विषय का विश्लेषण विरुद्धान्न संकल्पना में किया है.
आजकल हम देखते है ब्रेकफास्ट के लिए दुध या चाय के साथ खारी, ब्रेड, पाव, बिस्किट्स, इत्यादि पदार्थ बड़े-छोटे सब बहोत चाव से खाते है. दुध का प्राकृतिक रस मधुर है, और ऊपर दिए हुए सारे पदार्थोंमें नमक काफी मात्रा में होता है. आयुर्वेद के अनुसार दुध और नमक एकसाथ संयोग में विरुद्धान्न होते है. दुध जो केवल अकेले सेवन करने पे फायदेमंद होता है, नमक के साथ शरीर में जाकर हानि करता है. ऐसे महत्वपूर्ण अन्नघटकोंका किसी भी पदार्थोंके साथ मिश्रण करते समय सावधानी बरतनी चाहिए नहीं तो उनके निरन्तर सेवन से शरीर पर गंभीर परिणाम हो सकते है और इसी विषय का विश्लेषण विरुद्धान्न संकल्पना में किया है.
Monday, 16 October 2017
दिवाळीतील अभ्यंगाचे महत्व. कसे करावे अभ्यंग?
दिवाळी म्हंटली कि सगळयांना एक वेगळाच उत्साह संचारतो.
आकाशदिवे, रांगोळ्या, फटाके, फराळ, पुरणपोळी, इत्यादींची रेलचेल सुरु होते. पण या सर्व
धामधुमीमध्ये एका गोष्टीचा लहान मुलांना फार कंटाळा असतो आणि ते म्हणजे पहाटेचे
"अभ्यंगस्नान". फक्त लहानच काय तर आजकालची तरुणपिढीदेखील अभ्यंगस्नानास सासुरवास
अशा नजरेने बघतात. का बरे आपल्या पूर्वजांनी पहाटेच्या गारठ्यात उठून अंगाला तेल उटणे लावून स्नान करण्याचा हा प्रघात
घालून ठेवला असेल?
चला तर या अभ्यंगस्नानाचे वैज्ञानिकदृष्ट्या असणारे महत्व
जे आयुर्वेदाने हजारो वर्षांपूर्वी ओळखून सांगून ठेवले आहे ते जाणून घेऊयात.
दिवाळी हा सण हिवाळ्यात (http://www.ayurbeej.in/2016/04/diet-and-lifestyle-as-per-ayurveda-in.html ) येतो. यावेळी वातावरणातील
शीतता (थंडपणा) वाढून त्वचा रुक्ष व कोरडी होते. यावेळी भेगा पडणे, त्वचा काळवंडणे,
खाज सुटणे, इत्यादी तक्रारी सुरु होतात. शरीरातील वात दोषाचे (वातदोषhttp://www.ayurbeej.in/2015/12/vata-dosha-leader-of-tridosha.html) प्राबल्य वाढू लागते, म्हणून या ऋतूत दिवाळी सणांतील
अभ्यंगस्नानास अत्यंत महत्व आहे.
Sunday, 15 October 2017
Monday, 2 October 2017
Tuesday, 20 June 2017
Yoga - Why & How?
Modern world
has changed our lifestyles coupled with lack of exercise, irregular eating and
sleeping habits, stress etc are leading to the imbalance of mental, physical harmony
resulting in various illnesses which we call lifestyle diseases e.g. diabetes
mellitus, PCOD, obesity, depression etc. In past two decades, lifestyle diseases
incidences have risen rapidly. When there are diseases, there are treatments.
Experts all over the world are helping people to control these diseases using
different types of therapies, Yoga Is one of them, which is, not only helps in
curing it but also if practiced regularly can help in prevention. Yoga is an
excellent supportive or complementary treatment along with the existing therapies.
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